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गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

सुभाषितम्

 

        अद्यतनं सुभाषितम् 

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुः विद्या यशोबलम्।।

अर्थात् बड़ों का अभिवादन करने वाले मनुष्य की और नित्य वृद्धों की सेवा करने वाले मनुष्य की आयु, विद्या,यश और बल-ये चार चीजें सदैव बढ़ती हैं।

अद्यतनसुभाषितम्

        अद्यतनसुभाषितम्     कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।     मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि।।   अर्थात्   श्रीकृष्ण अर्जुन...