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रविवार, 1 मई 2022

सुभाषितम्


 

        अद्यतनं सुभाषितम् 

कल्पद्रुमः कल्पितमेव सूते, 
सा कामधुक् कामितमेव दोग्धि ।
चिन्तामणिः चिन्तितं एव दत्ते ,
सतां हि  सङ्गः सकलं प्रसूते।।

अर्थात् कल्पवृक्ष कल्पना किया हुआ ही देता है, कामधेनु इच्छित वस्तु ही देती है, चिन्तामणि जिसका चिन्तन करते हैं ,वहीं देता है लेकिन सत्संग तो  सब कुछ ही देता है।

अद्यतनसुभाषितम्

        अद्यतनसुभाषितम्     कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।     मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि।।   अर्थात्   श्रीकृष्ण अर्जुन...