"सांई" अर्थात् ईशः, ईश्वर, परमात्मा।इस परमात्मा का आत्मा के रूप में सभी जीवों में वास है।इसकी अनुभूति देकर एकात्मता की शिक्षा देने के लिए ही "श्री सांई " का अवतरण हुआ।
संस्कृत भाषा भारत की आत्मा के रूप में ,प्राण के रूप में धर्म एवं संस्कृति हैं। अनादिकाल से संस्कृत ही संस्कृति की वाहिका है।अतः संस्कृत हमारी सांस्कृतिक भाषा है।
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